असम में एक सहकारी समिति के लगभग 2,000 दूध विक्रेताओं ने एक स्कूल के उच्चतर माध्यमिक विभाग में पठन-पाठन सुचारू रखने के लिए दूध की बिक्री से प्राप्त होने वाली अपनी आय से प्रति लीटर 15 पैसे उसे दान में देने का फैसला किया है. स्कूल के उच्चतर माध्यमिक विभाग को अभी तक सरकार की ओर से आर्थिक सहायता नहीं मिली है. इस पहल के जरिए एकत्र किए गए पैसे से, ‘सीताजाखला दुग्ध सहकारी समिति’ ने दो दिन पहले सीताजाखला उच्चतर माध्यमिक स्कूल को 11वीं और 12वीं की कक्षाएं संचालित करने के लिए एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया. मोरीगांव जिले में स्थित यह सहकारी समिति राज्य की सबसे पुरानी डेयरी सहकारी समितियों में एक है.
सहकारी समिति के अध्यक्ष रंजीब सरमा ने कहा, “हमारे दूध विक्रेताओं के बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं. स्कूल की निचली कक्षाओं को सरकार ने 1986 में ले लिया था. उच्चतर माध्यमिक विभाग अब भी वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. स्कूल की हालत से व्यथित दूध विक्रेताओं ने अपनी आय का एक भाग दान करने का निर्णय लिया.”
उन्होंने कहा कि कुछ चर्चा करने के बाद, दो हजार से अधिक दूध विक्रेताओं ने निर्णय लिया कि जितना दूध बिकेगा उससे प्राप्त आय में से प्रति लीटर 15 पैसा दान दिया जाएगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई जारी रहे. सरमा ने कहा, “दूध विक्रेताओं के समर्थन से, सीताजाखला दुग्ध सहकारी समिति ने स्कूल के उच्चतर माध्यमिक विभाग को हर साल एक लाख रुपये दान देने का संकल्प लिया है, जब तक कि इसे सरकार अपने अधीन नहीं कर लेती.” उन्होंने कहा कि छात्रों के माता पिता ने स्कूल में कृषि पर पाठ्यक्रम शुरू करने का आग्रह भी सरकार से किया है.
शिक्षण संस्थान के प्रधानाध्यापक उत्तम डेका ने सरकार से अपील की कि वह मोरीगांव में गोभा आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के अपने प्रयास में आगे आए और उसका समर्थन करे. उन्होंने कहा, ‘वित्तीय सहायता में हमारी मदद करने के लिए हम सीताजाखला दुग्ध सहकारी समिति के आभारी हैं. यह पहल स्कूल को बनाए रखने में एक लंबा सफर तय करेगी.’ डेयरी व्यवसाय के बारे में बात करते हुए सरमा ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान समाज को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा, लेकिन अब स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है.
