दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन का समापन हुआ


 नगांव से रवीन्द्र शाह की रिपोर्ट 

नगांव जिले के कलियाबर सोलंग स्थित, मानव सेवा समिति श्रीहंस नाम बोध आश्रम परिसर में आयोजित दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन में लगभग लाखों के संख्या भीर उपस्थित हुए हैं।कल सत्संग का समापन हुआ।श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मानव धर्म के प्रणेता सतपाल महाराज ने कहा कि भारत भूमि इतना महान पवित्र है कि स्वयं नारायण अवतरित हुए।और रामकृष्ण परमहंस,कबीर आदि महापुरुषों ने जन्म लिया। भारत विश्व गुरु एवं सोने की चिड़िया कहलाता था। सतपाल जी ने कहा कि आतंकवाद के कोई धर्म नहीं होता। क्यों कि कोई भी धर्म हिंसा नहीं सिखाता।

असम में शंकरदेव,माधवदेव इस धरा धाम में आकर सभी को वैष्णव बनाकर एक सम्प्रदाय में पिरोने का काम किया है। अतः हम सभी को एकसाथ मिलकर शांति भाईचारा के साथ रहना चाहिए। भारत में गंगा में बहती है जो गोमुख से निकलती है।भागीरथ की अथक प्रयास से स्वर्ग में बहने वाली अमृत की धारा धरती पर आई। गंगा मां के पास कोई जाता तो वह जाति धर्म नहीं पुछती, गंगा मां तो प्यासों की प्रयास बुझाती।

 हमें भी बिना भेदभाव के भावना से भौतिकवाद में और अध्यात्म ज्ञान प्रचार प्रसार में अपना अपना योगदान देना चाहिए, तभी यह भारत विश्व गुरु बनेगा।

असम वासियों को परम सौभाग्य है कि, यहां बड़े लम्बे समय से सत्संग और दर्शन का लाभ मिलता है।

आगे सतपाल जी महाराज ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर भारत स्वच्छता अभियान कार्यक्रम के तहत पूरे भारतवर्ष में फैली, मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में निरंतर सफाई अभियान जारी है, उन्होंने सभी लोगों से अपील कि हे कि सभी अपने अपने घरों ,आस पड़ोस, गांव शहर स्वच्छ रखें। सम्मेलन में उपस्थित माता अमृता रावत एवं श्री विभु जी महाराज जी ने सत्संग पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम को सफल बनाने में सैकड़ों की तादाद में स्वयंसेवकों को नियुक्त किया गया था। विशाल पंडाल में पुरे असम के हजारों भक्तों ने भाग लिया और अपने गुरु महाराज का दर्शन कर लाभ उठाया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महात्मा-बाईजी के साथ ही मानव उत्थान सेवा समिति के सैकड़ों सदस्यों ने अपनी अहम भूमिका निभाई।इसकी जानकारी उत्तर पूर्वांचल के महासचिव गोकुल बोरा,  जोगेन्दर साह, विनोद राय ने दी है। अश्रुपूर्ण भाव से सभी अनुयायियों ने महाराज जी, अमृता माता,विभू महाराज को विदाई दी और अगले साल पुनः दर्शन की आस लिए अपने अपने गंतव्य स्थान की ओर लौट रहे हैं।