मुजफ्फरपुर से अफजल इमाम ’’मुन्ना’’ की रिपोर्ट
बिहार में जाली सर्टिफिकेट बनाने का बड़ा खेल चल रहा है। जहां बड़ी तादाद में बेरोजगार युवक इस जद में आ रहे हैं। मेरिट लिस्ट पर मिलने वाली नौकरी के लिये युवक जालसाज के चक्कर में फंस रहे हैं। इसका खुलासा उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ है। जहां भारतीय डाक विभाग के ग्रामीण डाक सेवक यानी जीडीएस पद पर बहाली में फर्जीवाड़े का बड़ा कारनामा सामने आया है। बहाली के लिये फर्जी सर्टिफिकेट देने वाले 11 अभ्यर्थियों को प्रधान डाकघर से गिरफ्तार किया गया है। जबकि, पूछताछ के बाद पुलिस ने जालसाज गिरोह के मास्टरमाइंड संतोष कुमार सिंह को छपरा बाजार के एक कैफे से गिरफ्तार किया है। वह छपरा जिले के गोविंदपुर का रहने वाला है। इन गिरफ्तार लोगों के पास से जब्त किये गये मोबाइल से काफी साक्ष्य मिले हैं, जिसमें प्रमाण पत्र लेन-देन के साथ राशि लेने का ब्योरा तक मिला है। इन सभी से पूछताछ की गयी। पूछताछ के बाद मार्च महीने की 23 तारीख को सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने दिया गया है। बाद में रिमांड पर लेकर नकेल कसने की कवायद की जायेगी। बताया जा रहा है कि सर्टिफिकेट सत्यापन के लिये मुजफ्फरपुर स्थित प्रधान डाकघर में बुलाया गया था। जहां एक अभ्यर्थी के अंक पत्र में अंग्रेजी में 98 नंबर थे। लेकिन, उसे इंग्लिश लिखने तक नहीं आ रहा था। एक अन्य अभ्यर्थी को 500 में कुल 491 अंक दर्ज हैं। इसके अलावा, गिरफ्तार अन्य युवकों के भी मार्कस काफी ज्यादा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जालसाज गिरोह का नेटवर्क बिहार ही नहीं, परोसी राज्य झारखंड तक फैला हुआ है। जालसाज गिरोह ने एक ही स्कूल के कोड पर सभी कैंडीडेट का सर्टिफिकेट तैयार किया था। सत्यापन के दौरान ऑनलाइन इसका वेरीफिकेशन किया गया तो उस रोल नंबर का अंक कहीं दिखा ही नहीं। यही नहीं जिस झारखंड बोर्ड का मैट्रिक सर्टिफिकेट दिया गया। उस वर्ष यानी 2020 में टॉपर को अधिकतम अंक 490 मिले थे। शक होने पर जब सख्ती की गयी तो दो ने खुद की फर्जी सर्टिफिकेट होने की बात कबूल कर ली है।
रेल डाक सेवा यू डिवीजन के इंस्पेक्टर राजेश कुमार का कहना है कि अन्य 9 अभ्यर्थी दस्तावेज के सही होने पर अड़े थे। पूरे मामले की जानकारी देने पर प्रधान डाकघर पहुंची मुजफ्फरपुर नगर थाने की पुलिस ने सभी को हिरासत में लेने के बाद एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि कुल 52 अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट सत्यापन के लिये मुजफ्फरपुर प्रधान डाकघर पहुंचना था। लेकिन, 11 ही आये। पुलिस की पूछताछ में अभ्यर्थियों ने बताया कि 3 लाख से 5 लाख रूपये तक में सौदा तय हुआ था। ढाई लाख पहले दिया गया था। नौकरी लगने के बाद और ढाई लाख देने थे। रेल डाक सेवा के इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने बताया कि भारतीय डाक विभाग में जीडीएस पद के लिये भर्ती प्रक्रिया हुयी थी। इसमें कई छात्रों का मेरिट लिस्ट निकल चुका था। इसको लेकर सुबह से शाम के 6 बजे तक वेरिफिकेशन प्रक्रिया चल रही थी। जिसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित दूसरे अन्य राज्यों में इनकी बहाली होनी थी। लेकिन, फॉर्म भड़ने के वक्त इन लोगों ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराने के लिये मुजफ्फरपुर केंद्र ही चुना था। जब इनका वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू की गयी तो होश उड़ गये। इनमें से किसी का भी डोकोमेंट ऑनलाइन शो नहीं कर रहा था। सभी के स्कूल में दिये जाने वाले क्रमांक कोड एक ही था। जिसके बाद इन पर शक गहरा गया। तब जाकर उन्हें पकड़ा गया।
जाली सर्टिफिकेट पर नौकरी पाने की कोशिश करने वाले 11 अभ्यर्थियों में से 7 सारण, 2 गोपालगंज, 1-1 सिवान, बक्सर व पटना का रहने वाला है। बक्सर के अभ्यर्थियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि ढाई लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। छपरा के एक साइबर कैफे से फॉर्म डाला गया था। उसी ने जाली सर्टिफिकेट बनाया था। नौकरी लगने के बाद बाकी ढाई लाख रुपये देने थे। लेकिन, इससे पूर्व सभी पकड़े गये, जिसके बाद सभी को पुलिस के हवाले सौंप दिया गया। मुजफ्फरपुर नगर थाना के थानाध्यक्ष श्रीराम सिंह ने बताया कि इस मामले में 11 लोगों की गिरफ्तारी हुयी है। गिरफ्तार लोगों में सारण के छपरा बाजार निवासी मास्टरमाइंड संतोष कुमार सिंह के अलावा छपरा के जीतेश कुमार, राकेश कुमार पांडेय, संदेश कुमार, विवेक कुमार, अमन कुमार, दिलीप कुमार यादव, धनोज कुमार ठाकुर व गोपालगंज के राजन कुमार, सीवान निवासी विवेक कुमार तिवारी एवं बक्सर निवासी मुकेश कुमार शामिल हैं। मुजफ्फरपुर प्रधान डाकघर के रेल डाक इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने एफआईआर दर्ज करायी है। भारतीय डाक विभाग की ओर से ग्रामीण डाक सेवक यानी जीडीएस के लिये ऑल इंडिया स्तर पर विज्ञापन निकला था। रेल डाक निरीक्षक के मुताबिक, फर्जी सर्टिफिकेट मामले में धराये बिहार के अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड के लिये आवेदन किया था, जिसके सर्टिफिकेट की जांच मुजफ्फरपुर प्रधान डाकघर में हो रही है। फर्जी सर्टिफिकेट में अधिकतर झारखंड बोर्ड, उत्तर प्रदेश बोर्ड एवं अन्य के हैं। कुल 52 का सत्यापन होना था। लेकिन, 11 के पकड़े जाने के बाद अन्य सत्यापन के लिये आगे नहीं आये। बता दें कि, जीडीएस की बहाली के लिये ऑल इंडिया स्तर पर इस वर्ष 27 जनवरी को जीडीएस पद की बहाली का विज्ञापन निकला था। बेेरोजगार की मार झोल रहे युवाओं ने आनलाइन आवेदन फार्म भरे थे। प्रमाणपत्र सत्यापन के लिये इन लोगों ने मुजफ्फरपुर प्रधान डाकघर का विकल्प दिया था। ज्यादा अंक वाले अभ्यर्थियों की चयन सूची 19 फरवरी को जारी की गयी थी। मुजफ्फरपुर प्रधान डाकघर के रेल डाक कार्यालय में फर्जी प्रमाण पत्र सामने आने पर 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया है। इस तरह जालसाज की वजह से अब बहाली की प्रक्रिया कानूनी पचड़े में पड़ गयी है।
दरअसल, बिहार के 9 डाक प्रमंडल में ग्रामीण डाक सेवा अभ्यर्थियों की चार चरणों की बहाली में 95 प्रतिशत से ज्यादा अभ्यर्थी फर्जी पाये जाने की बात सामने आ रही थी। इन सभी के सर्टिफिकेट फर्जी निकले। अकेले तीसरे व चौथे चरण की बहाली में ही चयनित 647 अभ्यर्थियों में से 592 के सर्टिफिकेट फर्जी मिले। कई अभ्यर्थियों ने 3-3 लाख में डील की बात कबूली है। इसी वजह से हर चरण की बहाली में लगातार अधिकांश फर्जी अभ्यर्थी यहां सामने आ रहे थे। तंग आकर भारतीय डाक विभाग अब फर्जी सर्टिफिकेट पर चयनित ग्रामीण डाक सेवकों के खिलाफ पहली बार कानूनी कार्रवाई करने में जुट गया है। पांचवें चरण की बहाली में पहली बार मुजफ्फरपुर में 11 फर्जी सर्टिफिकेट वाले पकड़े गये हैं। इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। जालसाज गिरोह का एक मास्टरमाइंड भी पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है। वहीं, चंपारण प्रमंडल के डाक अधीक्षक आशुतोष आदित्य की ओर से भी 37 फर्जी सर्टिफिकेट वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही पश्चिम चंपारण, सारण, सीवान, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी तथा आरएमएस के यू डिविजन में भी फर्जी सर्टिफिकेट वालों की धर-पकड़ के लिये आदेश जारी किये जा चुके हैं।
वैसे, भारतीय डाक विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण वर्ष 2013 से लेकर 2018 तक ग्रामीण डाक सेवकों के पद पर बड़े पैमाने पर फर्जी बहाली की बात सामने आयी है। मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी व मधुबनी जिले से प्राप्त अलग-अलग शिकायतों के आधार पर सीबीआई में 12 एफआईआर दर्ज है। अधिकतर मामलों में आरोप पत्र दाखिल किये जा चुके हैं। इसमें फर्जी कागजात पर बहाल 70 ग्रामीण डाक सेवक बर्खास्त किये जा चुके हैं। साथ ही, फर्जी बहाली में संलिप्त 3 डाक अधिकारी भी बर्खास्त हो चुके हैं।
