पटना से अफजल इमाम ’’मुन्ना’’की रिपोर्ट
रंगों का त्योहार ’होली’ में अब महज 6 दिन ही बचा है। ऐसे में देश के विभिन्न राज्यों के प्रमुख शहरों और मुंबई, दिल्ली, कोलकाता व चिन्नई जैसे महानगरों से घर लौटने की चिंता रेल यात्रियों के लिये सबसे बड़ी परेशानी बनकर सामने आ रही है। ट्रेनों में 3-4 महीने पूर्व से ही लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। अब किसी भी श्रेणी में रेल टिकट उपलब्ध नहीं है। मजबूरन लोग हवाई जहाज का टिकट तीन-चार गुणे मंहगे दामों में खरीद रहे हैं। वह भी अब नहीं मिल रहा है। मुंबई व दिल्ली की तरफ से आने वाली रेल ट्रेनों की स्थिति बेहद दयनीय है। रेल टिकट कंर्फ्म न होने के कारण लोग रेलवे स्टेशन के बुकिंग काउंटर से वेटिंग रेल टिकट कटाकर यात्रा करने को मजबूर हैं। ऐसा लगता है कि रेलवे इन दिनों ट्रेनों में टिकट चेकिंग के नाम पर प्लांटी काटकर यात्रा की मौखीक छूट दे रखी है। अब ऐसे में कंर्फ्म रिर्जवेशन टिकट वाले रेल यात्री भी काफी परेशानी झेलकर यात्रा कर रहे हैं। क्योंकि, एक-एक सीट पर पांच से सात यात्री जैसे-तैसे यात्रा पूरी कर अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच रहे हैं। होली एक ऐसा त्योहार है, जिसे हर व्यक्ति अपने परिवार के साथ मनाना चाहता है। रोजी-रोटी व जीविकोपार्जन की तमाम मजबूरियों के चलते ज्यादातर लोग अपने घर से दूर रहते हैं। यह साल भर का बड़ा त्योहार है। होली के मौके पर सबकी तमन्ना होती है कि वो भी अपने स्वजनों के साथ ही यह त्योहार मनाये। लेकिन, आमतौर पर इस मौके पर सबसे बड़ी परेशानी रेल टिकटों को लेकर होती है।
हालांकि, होली जैसे त्योहार की इस अतिरिक्त भीड़ को लेकर रेलवे ने कई होली स्पेशल ट्रेनों का परिचालन भी शुरू किया है। लेकिन, भारी भीड़ के कारण किसी भी ट्रेन में बर्थ खाली मिल पाना अब नामुमकिन है। भारी भीड़ का एक मुख्य कारण यह भी उभरकर सामने आता हैं कि पिछले कई वर्षों से कोरोना काल को लेकर प्रतिबंधों के दायरे में ही लोगों ने सभी पर्व-त्योहार मनाते रहे हैं। कोरोना व सोशल डिस्टेंसिंग कि बाध्यता के कारण पिछले तीन वर्षों से लोग पर्व-त्योहार मनाने अपने-अपने घरों को नही पहुंच सके थे। लेकिन, इस बार कोरोना कि सामान्य स्थिति होने पर पर्व-त्योहारों कि अतिरिक्त भीड़ ने परेशानी ज्यादा बढ़ा दी है।
रेल यात्रियों का कहना है कि तत्काल टिकट के लिये वो कई दिनों से स्टेशन के चक्कर काट रहे हैं। कई रात रेलवे स्टेशनों पर ही सोते-बैठते गुजारते हैं। ताकि, अगली सुबह तत्काल रेल टिकट कि पंक्ति में उनका पहला नम्बर हो व उन्हें कंर्फ्म रिर्जवेशन बर्थ मुहैया हो जाये। लेकिन, इस जद्दोजहद के बाद भी उन्हें तत्काल रेल टिकट नहीं मिल पा रहा है। रेल यात्रियों का कहना है कि रेलवे स्टेशन के बुकिंग काउंटर पर बुकिंग क्लर्क के द्वारा सिस्टम में फॉर्म भरते-भरते ही तत्काल कोटे की टिकटें ‘फूल‘ हो जाती हैं। अगर पूर्व से वेटिंग रेल टिकट कटा हुआ है, तो पहले तत्काल का वेटिंग टिकट कंर्फ्म होता है। एक-दो महीने पूर्वे कटे टिकटों का वेटिंग तो जल्द कंर्फ्म नहीं होना तो अब आम बात है। तीन-चार महीन पूर्व टिकट न करा पाना उनकी मजबूरी हैं। विभिन्न सार्वजनिक व निजी कंपनी व संस्थानों में कार्यरत लोगों का कहना है कि अभी भी उनकी छुट्टियां स्वीकृत नहीं हो पायी हैं। दो-चार दिन पहले छुट्टियां स्वीकृत होती है। जिस कारण अब तत्काल रेल टिकट ही उनकी आखिरी उम्मीद हैं। दिल्ली, मंुबई व कोलकाता जैसे महानगरों से चलने वाली हर सामान्य ट्रेन में वेटिंग की संख्या 300 से 400 पार हो चुकी है। कई ट्रेनों में नोरूम चल रहा है। इसलिए बुकिंग काउंटर से वेटिंग रेल टिकट भी मिलना मुश्किल है। ऐसे में कैसे सुखद यात्रा होगी। यह सोचने का विषय है।
बिहार आने वाले यात्रियों के लिए रेलवे की ओर से 35 होली स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। होली को देखते हुये फिर 2 जोड़ी सहित 4 जोड़ी होली स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। यह जानकारी पूर्व मध्य रेल मुख्यालय, हाजीपुर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने दी है। उनका कहना है कि 29 जोड़ी ट्रेन चलाने की सूचना पहले से थी। इसमें होली के अवसर पर यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर रेलवे द्वारा कई और स्पेशल ट्रेनों का परिचालन करने का निर्णय लिया गया है। इनमें से अब तक 29 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों की सूचना पूर्व में ही दी जा चुकी है। इसी क्रम में 04 जोडी और स्पेशल ट्रेनों के परिचालन करने का निर्णय लिया गया है। जिसका विवरण निम्नानुसार है। ट्रेन नंबर-07051 व 07052 यानी सिकंदराबाद-रक्सौल-सिकंदराबाद होली स्पेशल ट्रेन (सीतामढ़ी-दरभंगा-समस्तीपुर-बरौनी-किउल-झाझा-धनबाद-बोकारो-रांची के रास्ते) चलेगी। इसमें ट्रेन नंबर-07051 सिकंदराबाद-रक्सौल होली स्पेशल ट्रेन 04 मार्च 2023 (शनिवार) को सिकंदराबाद से 21.00 बजे खुलकर (सोमवार) को 13.30 बजे रक्सौल पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर-07052 रक्सौल-सिकंदराबाद होली स्पेशल ट्रेन 09 मार्च 2023 (गुरूवार) को रक्सौल से 19.15 बजे खुलकर (शनिवार) को 13.00 बजे सिकंदराबाद पहुंचेगी। इसी प्रकार ट्रेन नंबर-08127 व 08128 शालीमार-जयनगर-शालीमार होली स्पेशल ट्रेन (दरभंगा-समस्तीपुर-बरौनी-किउल-झाझा-धनबाद-बोकारो-टाटा के रास्ते) चलेगी। इसी तरह ट्रेन नंबर- 08127 शालीमार-जयनगर होली स्पेशल ट्रेन 06 मार्च 2023 (सोमवार) को शालीमार से 14.50 बजे खुलकर (मंगलवार) को 11.25 बजे जयनगर पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर-08128 जयनगर-शालीमार होली स्पेशल ट्रेन 07 मार्च 2023 (मंगलवार) को जयनगर से 19.30 बजे खुलकर (बुधवार) को 16.00 बजे शालीमार पहुंचेगी। इसी तरह ट्रेन नंबर-08183 व 08184 संतरागाछी-बलरामपुर-संतरागाछी होली स्पेशल ट्रेन (गोमो-गया-डीडीयू-वाराणसी-गोरखपुर के रास्ते) चलेगी। ट्रेन नंबर-08183 संतरागाछी-बलरामपुर होली स्पेशल ट्रेन 06 मार्च 2023 (सोमवार) को संतरागाछी से 20.30 बजे खुलकर (मंगलवार) को 22.00 बजे बलरामपुर पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर-08184 बलरामपुर-संतरागाछी होली स्पेशल ट्रेन 08 मार्च 2023 (बुधवार) को बलरामपुर से 21.30 बजे खुलकर (गुरूवार) को 23.15 बजे संतरागाछी पहुंचेगी। इसी तरह ट्रेन नंबर-08028 व 08027 रांची-बलरामपुर-रांची होली स्पेशल ट्रेन (गोमो-गया-डीडीयू-वाराणसी-गोरखपुर के रास्ते) चलेगी। वहीं, ट्रेन नंबर-08028 रांची-बलरामपुर होली स्पेशल ट्रेन 05 मार्च 2023 (रविवार) को रांची से 23.55 बजे खुलकर (सोमवार) को 22.00 बजे बलरामपुर पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर-08027 बलरामपुर-रांची होली स्पेशल ट्रेन 07 मार्च 2023 (मंगलवार) को बलरामपुर से 08.45 बजे खुलकर (बुधवार) को 05.00 बजे रांची पहुंचेगी। इस प्रकार अब तक होली के अवसर पर पूर्व मध्य रेल क्षेत्राधिकार से खुलने व गुजरने वाली कुल 35 जोड़ी स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। इन स्पेशल ट्रेनों द्वारा कुल 161 फेरे लगायी जानी तय है।
दूसरी ओर सुखद यात्रा हेतु शुरू की गयी इन ट्रेनों में भी अतिरिक्त भीड़ के कारण घोषणा के दिन ही अधिकांश ट्रेनों में सारे बर्थ फूल हो चुके हैं। सबसे ज्यादा परेशानी का शिकार सूबे बिहार के विभिन्न गांवों से देशभर के विभिन्न राज्यों में मजदूरी कर कमाने वाले लोगों को हो रही है। वे ना तो खुद से ऑनलाइन तत्काल कोटे में रेल टिकट बुक करने में सक्षम हैं और न ही अधिक पैसे देकर एसी में यात्रा करने के योग्य हैं। इन सभी दुविधाओं के अलावे एलएच बीफिकेशन के नाम पर रेलवे ने नये रेक लगाने के क्रम में हर ट्रेन से स्लीपर डिब्बों को घटा दिया है व एसी कोच को बढ़ा दिया है। पुराने 12 से 14 स्लीपर डिब्बे युक्त रेक में अब 6 से 7 स्लीपर डिब्बे ही लगाये जा रहे हैं। बिहार के ज्यातर गरीब व आर्थिक रूप से असक्षम रेल यात्री 20 से 36 घंटों की रेल यात्रा अधिक परेशानी झेलकर बेसिन व शौचालय के पास बैठकर करने को मजबूर हैं। इससे रेल यात्रियों के साथ-साथ आम लोगों में भी आक्रोश है। अब देखना है कि होली बाद अपने गणतव्य स्थानों पर लौटने के लिए बिहार के रेल यात्रियों को किन-किन परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है। यह तो वक्त आने पर ही पता चल सकता है।
