सिलचर से मदन सिंघल की रिपोर्ट
तीर्थदर्शन पर गए रांगिरखाड़ी निवासी संजय लोधा की घर वापसी नहीं हो सकी।
बराक घाटी के पारंपरिक शैव तीर्थस्थल भुवनतीर्थ में अचानक हृदयाघात से उनका निधन
हो गया। इस मर्मांतक घटना से पूरे रांगिरखाड़ी क्षेत्र में शोक की छाया छा गई है।प्राप्त
जानकारी के अनुसार, 15 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 20 मिनट के
आसपास भुवन तीर्थ में मौजूद रहते हुए वे अचानक अस्वस्थ हो गए। इस अचानक घटना से
वहां उपस्थित श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। ड्यूटी पर तैनात
स्वास्थ्यकर्मियों ने तुरंत प्राथमिक उपचार दिया और एंबुलेंस से अस्पताल भेजने की
व्यवस्था की।हालांकि, पहाड़ी रास्ते से नीचे उतरते समय बीच मार्ग में एंबुलेंस खराब हो गई, जिससे
स्थिति और भी गंभीर हो गई। बाद में मेडिकल टीम, पुलिस और दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे। उन्हें स्ट्रेचर के माध्यम से नीचे
लाया गया और वैकल्पिक व्यवस्था से अस्पताल भेजा गया।अस्पताल पहुंचने के बाद उनके
स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद की जा रही थी। परिवार और शुभचिंतक लगातार प्रार्थना
कर रहे थे, लेकिन सभी
प्रयास विफल रहे और दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर
उन्होंने अंतिम सांस ली।इस घटना के बाद राज्य की 108 एंबुलेंस सेवा की आधारभूत संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल
उठने लगे हैं। आरोप है कि कई एंबुलेंस पुरानी और यांत्रिक रूप से जोखिमपूर्ण
स्थिति में हैं, जिसके कारण
आपातकालीन समय में उनके खराब हो जाने से मरीजों के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो
रहा है।संजय लोधा के असमय निधन से उनके परिवार, रिश्तेदारों और क्षेत्रवासियों में गहरा शोक व्याप्त है।
