बारीक नगर में दिव्य भव्य श्रीमद्भागवत कथा का हुआ समापन


 

सिलचर से मदन सिंघल की रिपोर्ट

वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक श्री अशोकदेवाचार्य महाराज के पावन वाणी से सप्ताहव्यापी श्री भागवत कथा बुधवार को भक्ति भाव के बीच सम्पन्न हो गया। जिसमें समाज के सभी वर्ग ग्रामवासी क्षेत्रवासीजन बढ़ चढ़कर भाग लिया।गत 27 जनवरी से इस क्षेत्र में बड़े हर्षोल्लास के साथ कलश यात्रा में जनता जनार्दन प्रभुप्रेमी सभी भक्तगणबढ़ चढ़कर शामिल हुए । बहुत ही सुंदर जलयात्रा का विहंगम दृश्य पूरे समाज में सौभाग्यवती माताओं बहनों ने कलश यात्रा में 1008, माताओं ने कलश यात्रा में भाग लिया। जिसमें क्षेत्र की सभी मातृशक्ति ने भाग लिया। बराकघाटी के लिए एक कौतूहल से कम नहीं था। त्रेता में जैसे रामचंद्र जी सेना चल रही हो ऐसा सुंदर पवित्र वातावरण रहा।श्री बरमबाबा मंदिर के समिति एवं आचार्यगण सभी ने मिलकर पूजन में सहभागिता प्रदान किए। श्री मद्भागवत कथा आयोजन समिति समिति की ओर से बरमबाबा मंदिर श्री जवाहर लाल पांडेय जी मंदिर पुजारी एवं एडिटर चीफअसम दर्पण एवं पूज्य महाराज श्री अशोक जी देवाचार्य जी का सभी ब्राम्हणों का सम्मान एवं सभी मातृशक्ति का स्वागत हुआ प्रथम दिवस कथा में– पूज्य महाराज श्री ने कथा के माध्यम से बहुत सरल सहज भाव से कथा माहात्म्य का श्रवण कराया की प्रभु की कथा ही जीवन के बंधन से जीव की मुक्ति हो सकती है । मनुष्य का जीवन अनमोल है। जो कृष्ण रूपी नौका में सवार हो जाता है निश्चित तौर में पार हो जाएगा।।द्वितीय दिवस– में पूज्य महाराज श्री ने कलियुग के दुर्गुणों का वर्णन किया कि । परिश्रम के द्वारा धन ही जीवन को सही दिशा और जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।तृतीय दिवस– में बहुत ही मार्मिक भक्ति का योग नियम भाव भक्ति आराधन से ईश्वर की प्राप्ति संभव है। देवहूति कर्दम का पावन प्रशंग। एवं लोभ को शांत करने के लिए ही प्रभु का आगमन होता है। चतुर्थ दिवस– दिव्य उत्सव राम विग्रहवान धर्मः। राम का जीवन ही मर्यादा की शिक्षा मिलती है। परिवार का महत्व। धर्म से मनुष्य की कामनाओं की पूर्ति सम्भव है। कृष्ण का जन्म ही अत्याचारों का विनाश के लिए होता है। जब पृथ्वी में अत्याचार होता है।। तो प्रभु का आगमन होता। अपार जन समुदाय भक्तों का जनसैलाब देखने को मिला कथा में पूरे क्षेत्र में पूरा भक्तों का ताता लगा रहा। महाप्रसाद वितरण चलता रहा। पंचम दिवस में भक्त की रक्षा के लिए भगवान ने सारे नियम बदलते है। भक्त ही मेरा नियम है धर्म है। भाव से जो भजता है उसका भी बेड़ा पार होता है।षष्ठ दिवस में महाराज श्री ने बहुत सुंदर प्रशंग श्रवण कराया– कृष्ण के चरणो में ही भक्ति करके पराभक्ति की प्राप्ति है। गिरिराज लीला के माध्यम से समाज को प्रभु ने सभी को जीने का अधिकार प्रदान किया है रुक्मणि विवाह के माध्यम से भगवान अष्ट प्रकृति को कैसे धारण करते हैं। सभी भक्तों ने भी बड़े ही धूमधाम से पर्व मनाया। सप्तम दिवस में भगवान की कृपा उसी के जीवन में सम्भव है जिसका अन्तःकरण पवित्र है, जिसका निर्मल मन है, सुदामा कृष्ण का सुंदर मार्मिक प्रशंग श्रवण कर श्रोताओं को अपार सुख की अनुभूति प्राप्त हुई। कथा विश्राम पूर्णाहुति महाप्रसाद के साथ समिति के सभी कार्यकर्ता गण विद्वान ब्राह्मणों के द्वारा यज्ञ का समापन हुआ।। समिति के अध्यक्ष शंकर नुनिया ने सभी को महाप्रसाद में आने के लिए निमंत्रण दिया।बताते चले के क्षेत्र के प्रसिद्ध समाजसेवी श्री शंकर प्रसाद नुनिया, प्रदीप कुमार कुर्मी,एवं राजू नुनिया, कंचन नुनिया, सीतांशु प्रसाद ग्वाला (पैलापुल )एवं चंपालाल ग्वाला, बाबुल ग्वाला, युवा व्यापारी सूरज नुनिया, सागर नुनिया, देवेंद्र सरकार, श्रवण नुनिया, रामबाबू नुनिया, सुवचन ग्वाला समेत क्षेत्र के सभी गणमान्य श्रद्धालुजन उपस्थित हुए।