19 सितम्बर 2025 को सिंगापुर में असम के सांस्कृतिक
प्रतीक ज़ुबिन गर्ग की रहस्यमय मृत्यु राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर अब भी
गहरी छाया डाले हुए है। राजनीतिक दलों और उनके प्रशंसकों की अपील के बावजूद कि
उनके नाम को दलगत बहसों से दूर रखा जाए, उनकी मृत्यु की परिस्थितियाँ आगामी असम विधानसभा चुनावों—जो अप्रैल
2026 में पश्चिम बंगाल,
तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनावों के साथ
होने वाले हैं—के प्रचार अभियान को प्रभावित करती दिखाई दे रही हैं।
उनकी मृत्यु के पाँच महीने से अधिक समय
बीत जाने के बाद भी ज़ुबिन के समर्थक—विशेषकर युवा—सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों
पर न्याय की माँग करते हुए आवाज़ उठा रहे हैं। इस भावनात्मक मुद्दे ने असम की
चुनावी चर्चा को एक संवेदनशील आयाम दे दिया है।
राज्य में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा
सरमा के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इस घटना के कथित
“दुरुपयोग” या “कुप्रबंधन” को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ा है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की असम इकाई ने भाजपा-नेतृत्व वाली दिसपुर सरकार को
निशाना बनाते हुए “चार्जशीट 2026” जारी
की। इसमें बढ़ते सार्वजनिक ऋण, कथित
रूप से संपत्ति का केंद्रीकरण, कोच
राजबोंग्शी, ताई अहोम, मोरान, मोटोक, सुटिया और चाय जनजाति समुदायों से किए
गए अधूरे वादों तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा उजागर की
गई कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों के साथ-साथ ज़ुबिन की मृत्यु की जाँच में कथित
कमियों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
असम के पूज्य सांस्कृतिक प्रतीक ज़ुबिन
गर्ग के लाखों प्रशंसकों और शुभचिंतकों के साथ साथ लगभग सभी राजनीतिक दल सार्वजनिक
रूप से यह कहते रहे हैं कि इस महान गायक के नाम को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
फिर भी, पिछले वर्ष विदेश में
हुई उनकी रहस्यमय मृत्यु आगामी विधानसभा चुनावों की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन
सकती है। संकेत मिल रहे हैं कि अप्रैल 2026 में होने वाले असम विधानसभा चुनावों (जो
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु,
केरल और पुडुचेरी के चुनावों के साथ
होंगे) में 19 सितम्बर
2025 को सिंगापुर में हुई
उनकी रहस्यमय मृत्यु तथा उसके बाद की जाँच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर तीव्र
चुनावी प्रचार देखा जा सकता है। उनके निधन के पाँच महीने बाद भी सोशल मीडिया पर
युवाओं के बीच न्याय की माँग लगातार उठती रही है।
सत्तारूढ़ भाजपा, विशेषकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
को इस मामले के कथित “कुप्रबंधन” को लेकर शुरुआती आलोचना झेलनी पड़ी। इसके बाद
प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने कई आरोपों की श्रृंखला पेश की और ज़ुबिन के शोकाकुल
परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने की माँग की। असम प्रदेश कांग्रेस समिति (एपीसीसी) ने
भाजपा-नेतृत्व वाली दिसपुर सरकार के खिलाफ “चार्जशीट 2026” जारी करते हुए ज़ुबिन की अनसुलझी मृत्यु
की जाँच की कथित अक्षम प्रक्रिया को रेखांकित किया। लंबे समय तक असम और पूर्वोत्तर
के अन्य राज्यों में शासन कर चुकी कांग्रेस ने बढ़ते सार्वजनिक ऋण, कथित अवैध संपत्ति संचय, कोच राजबोंग्शी, ताई अहोम, मोरान, मोटोक, चुटिया और चाय जनजाति समुदायों से किए
गए वादों को पूरा न करने, नियंत्रक
एवं महालेखा परीक्षक द्वारा चिन्हित अनियमितताओं पर कार्रवाई न करने, सरकारी स्कूलों के बंद होने सहित कई
अन्य मुद्दे भी उठाए।
हाल ही में वरिष्ठ कांग्रेस नेता
प्रियंका गांधी वाड्रा के असम दौरे के दौरान वायनाड की सांसद ने ज़ुबिन के मुद्दे
को उठाते हुए कहा कि यह महान गायक हमेशा राजनीति से दूर रहे और इसलिए उनकी
दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। श्रीमती प्रियंका ने गुवाहाटी
के निकट सोनापुर स्थित ज़ुबिन के समाधि स्थल पर जाकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि
भी अर्पित की। मुख्यमंत्री सरमा पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का व्यक्तिगत आरोप
लगाते हुए गांधी परिवार की इस नेता ने एपीसीसी प्रमुख गौरव गोगोई और उनके परिवार
को कथित पाकिस्तान संबंधों को लेकर मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाने की भी आलोचना
की। उन्होंने गुवाहाटी के नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित पवित्र शक्तिपीठ कामाख्या
मंदिर में भी देवी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
असम पुलिस की एक टीम ने पहले ही सात
व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिन
पर ज़ुबिन की कथित “हत्या” में शामिल होने का संदेह है। वे 19, 20 और 21 सितम्बर 2025 को आयोजित होने वाले चौथे नॉर्थ ईस्ट
इंडिया फेस्टिवल में प्रस्तुति देने के लिए सिंगापुर गए थे। गिरफ्तार आरोपियों में
महोत्सव के आयोजक श्यामकानु महंत, ज़ुबिन
के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, बैंड
सदस्य शेखर ज्योति गोस्वामी, सहगायिका
अमृतप्रभा महंत, ज़ुबिन
के चचेरे भाई संदीपन गर्ग तथा दो निजी सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं, जो अब भी न्यायिक हिरासत में हैं। असम
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मुन्ना प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में गठित विशेष जाँच दल
साक्ष्य जुटाने के लिए सिंगापुर भी गया था और बाद में 12 दिसम्बर को अदालत में एक हजार पृष्ठों
की चार्जशीट दायर की।
हाल ही में शोकाकुल परिवार ने 24
जनवरी को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र
लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले की सुनवाई में तेजी लाने के लिए एक
विशेष अदालत स्थापित करने की पहल करने का अनुरोध किया। ज़ुबिन की पत्नी गरिमा
सैकिया गर्ग ने स्थानीय अदालत में मुकदमे की सुनवाई में हो रही देरी पर चिंता
व्यक्त की। इससे पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि सिंगापुर से ज़ुबिन
की मृत्यु से संबंधित परेशान करने वाली खबरें सामने आई हैं, जिनमें कहा गया कि वे अत्यधिक नशे की
हालत में थे और समुद्र में बिना अनिवार्य लाइफ जैकेट के तैर रहे थे। सिंगापुर के
प्रमुख अखबार द स्ट्रेट्स टाइम्स ने
14 जनवरी को अपनी
रिपोर्ट में कहा था कि ज़ुबिन की मृत्यु में किसी प्रकार की आपराधिक साजिश के
संकेत नहीं मिले। इसके बावजूद परिवार ने इस त्रासदी के वास्तविक कारणों का पता
लगाने के लिए सिंगापुर में उपयुक्त कूटनीतिक हस्तक्षेप की माँग की।
उल्लेखनीय है कि सिंगापुर पुलिस के
अन्वेषक डेविड लिम ने कोरोनर की जाँच के दौरान गवाही देते हुए बताया कि ज़ुबिन ने
शराब का सेवन किया था, उन्होंने
लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया और एक यॉट से समुद्र में कूद गए, जिसके बाद लाज़ारस द्वीप के पास डूबने
से उनकी मृत्यु हो गई। अधिकारी ने बताया कि यॉट पर मौजूद उनके मित्रों ने उन्हें
समुद्र से वापस जहाज़ की ओर तैरकर आने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन अचानक वे निष्क्रिय हो गए और मुँह
के बल पानी पर तैरने लगे। उन्हें तुरंत जहाज़ पर लाया गया और सहायता करने की कोशिश
की गई। बाद में शाम 5 बजकर
15 मिनट (स्थानीय समय)
पर सिंगापुर जनरल अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मृत्यु का कारण डूबना
बताया गया। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि गायक में आत्महत्या की प्रवृत्ति नहीं
थी और न ही उन्हें किसी प्रकार के दबाव या मजबूरी का सामना करना पड़ा था; उन्होंने केवल यॉट के कप्तान द्वारा
बार-बार दी गई लाइफ जैकेट पहनने की सलाह को नजरअंदाज कर दिया।
हाल ही में संपन्न राज्य विधानसभा के
चार दिवसीय बजट सत्र के दौरान भी विपक्षी नेताओं ने ज़ुबिन के लिए त्वरित न्याय की
माँग करते हुए प्रदर्शन किया। इससे पहले एपीसीसी अध्यक्ष गौरव गोगोई ने
मुख्यमंत्री सरमा की उस टिप्पणी की आलोचना की थी जिसमें उन्होंने ज़ुबिन की मृत्यु
को हत्या की साजिश बताया था। गोगोई ने कहा कि सिंगापुर की जाँच रिपोर्ट ऐसे दावों
का समर्थन नहीं करती और पूछा कि अब असम की जनता किस पर विश्वास करे, क्योंकि सिंगापुर के अधिकारियों ने
बार-बार कहा है कि मृत्यु में किसी प्रकार की आपराधिक साजिश के प्रमाण नहीं मिले।
जवाब में सरमा ने कहा कि असम की जाँच सिंगापुर की जाँच से स्वतंत्र है और राज्य
पुलिस द्वारा की गई विस्तृत जाँच की सराहना की। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि
मामला अदालत में लंबित होने के कारण राजनेताओं को अटकलों से बचना चाहिए। कुछ महीने
पहले भाजपा ने गुवाहाटी, नलबाड़ी,
मंगलदोई, धेमाजी, डिब्रूगढ़, कछार आदि स्थानों पर “न्याय यात्राएँ”
भी आयोजित की थीं, जिनका
उद्देश्य ज़ुबिन की मृत्यु से जुड़े मामले में शीघ्र न्यायिक प्रक्रिया पर जोर
देना था।
इससे पहले दक्षिण भारत के एक प्रभावशाली
कांग्रेस नेता ने भी शोकाकुल परिवार से मिलकर ज़ुबिन को श्रद्धांजलि दी थी।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने जोरहाट में आयोजित अनुष्ठान में भाग
लेते हुए ज़ुबिन को सांस्कृतिक राजदूत बताया, जिनकी कला ने जीवनकाल में सीमाओं को पार
किया। हाल ही में धुबरी में समाजवादी पार्टी के एक नेता ने भी ज़ुबिन की मृत्यु की
जाँच और मुकदमे की प्रगति पर सवाल उठाया। असम में कांग्रेस के रणनीतिक सहयोगी इस
दल के नेता ने मामले की जाँच के लिए एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी—संभवतः केंद्रीय
अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई)—से जाँच कराने की माँग की, ताकि असम के लोगों को ज़ुबिन की मृत्यु
के बारे में स्पष्टता मिल सके और लंबे समय से लंबित न्याय सुनिश्चित हो सके।
126 सदस्यीय असम विधानसभा
का वर्तमान कार्यकाल 20 मई
2026 को समाप्त हो रहा है।
पिछले दो लगातार विधानसभा चुनावों (2016 और 2021) में
भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन को भारी जीत मिली थी। हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त
ज्ञानेश कुमार, चुनाव
आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी सहित अन्य चुनाव अधिकारियों की एक टीम ने
असम का दौरा किया। गुवाहाटी में हुई बैठक के दौरान राष्ट्रीय और स्थानीय राजनीतिक
दलों के प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग की टीम से अनुरोध किया कि चुनाव दो चरणों में
कराए जाएँ। स्थानीय मीडिया में इस समय चुनाव से जुड़ी खबरों और चर्चाओं की भरमार
है।
