नगांव से रवीन्द्र शाह की रिपोर्ट
पूरे
भारतवर्ष के साथ मोरीगांव जिले में भी पांच दिनीय बैंकिंग व्यवस्था प्रवर्तन की
मांग को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले एक प्रतिवादी कार्यक्रम का
आयोजन किया गया। पिछले दो महीनों से चल रहे आंदोलन के हिस्से के रूप में आज एक
दिवसीय देशव्यापी धरना कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।कार्यक्रम में आल इंडिया
पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के नगांव सर्कल कमिटी के वर्किंग प्रेसिडेंट और
आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के असम स्टेट कमिटी के एक्जीक्यूटिव मेंबर
प्रह्लाद बरकटकी ने प्रतिवादी कार्यक्रम में भाषण देते हुए कहा कि लंबे समय से
प्राइवेट बैंक के साथ तुलना करके पब्लिक सेक्टर बैंक के खिलाफ एक बिरूप धारणा समाज
में इच्छाकृत रूप से सृष्टि करने की कोशिश की जा रही है।प्राइवेट सेक्टर बैंक
पब्लिक सेक्टर बैंक की तुलना में उन्नत सेवा प्रदान करते हैं, यह एक
भ्रांत धारणा है, जो पूरी तरह से बास्तविकता विरुद्ध है। बास्तव
में पब्लिक सेक्टर बैंक में एक कर्मचारी को औसतन 1,600 से 2,500 ग्राहकों को
संभालना पड़ता है, जबकि प्राइवेट सेक्टर बैंक में एक कर्मचारी को
मात्र 300 से 400 ग्राहकों को
संभालना पड़ता है।बरकटकी ने आगे कहा कि देश के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में
बैंकिंग सेवा प्रदान करने में पब्लिक सेक्टर बैंकों ने मुख्य भूमिका निभाई है। लाभ
कम होने वाले कई गांवों में भी पब्लिक सेक्टर बैंकों ने जनसाधारण के स्वार्थ में
शाखा स्थापित करके सेवा प्रदान की है, जबकि
प्राइवेट बैंकों ने व्यवसायिक रूप से लाभजनक नहीं होने वाले क्षेत्रों में सेवा
प्रदान करने से परहेज किया है।धरना कार्यक्रम में आल असम प्रोविंसियल बैंक
एम्प्लयीज एसोसिएशन के मोरीगांव जिला समिति के सेक्रेटरी समजीत चक्रवर्ती और
प्रेसिडेंट दीपांकर बोरा के साथ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के अंतर्गत विभिन्न
यूनियनों के सदस्यों ने भाग लिया। अखिल भारतीय बैंक यूनियन के अंतर्गत विभिन्न
पब्लिक सेक्टर बैंकों के कर्मचारी और अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
